रक्षा सम्पदा महानिदेशालय

रक्षा संपदा महानिदेशालय भारतीय रक्षा संपदा सेवा का मुख्यालय है। रक्षा संपदा महानिदेशालय रक्षा मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय के अधीन सेना, नौ सेना, वायुसेना तथा अन्य संगठनों को छावनी तथा भूमि संबंधी सभी मामलों पर परमर्शी इनपुट प्रदान करता है। भूमि का अधिग्रहण, विस्थापित लोगों का पुनर्वास तथा पुनःस्थापन, भूमि तथा भवनों को किराये पर लेना तथा उसका अधिग्रहण जैसे कुछ कार्यों का निर्वहन रक्षा संपदा महानिदेशालय का दायित्व है। यह छावनी अधिनियम 2006, नीतियों, नियमों तथा विनियमों व कार्यकारी अनुदेशों के कार्यान्वयन को भी सुनिश्चित करता है।

रक्षा संपदा महानिदेशालय के कार्यक्षेत्र के अधीन छः प्रधान निदेशालय हैं, जिनके नाम हैं प्रधान निदेशक, मध्य, पूर्व, उत्तर, दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम तथा पश्चिम कमान। देश में रक्षा भूमि के प्रबंधन के लिए प्रधान निदेशालयों के अधीन 37 रक्षा संपदा अधिकारी तथा 4 सहायक रक्षा संपदा अधिकारी सर्किल हैं।

62 छावनी बोर्ड हैं। ये स्थानीय निकाय हैं जो नागरिक प्रशासन प्रदान करने तथा समाज कल्याण, जन स्वास्थ्य, सफाई, सुरक्षा, जलापूर्ति, स्वच्छता, शहरी नवीकरण व शिक्षा की केन्द्रीय सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी हैं।

रक्षा संपदा महानिदेशालय के मुख्यालय का संगठनात्मक ढांचा यहां दिया गया है।

विजन

रक्षा भूमि का कारगर व कुशलतापूर्वक प्रबंधन करना तथा छावनी में बेहतर, प्रभावी, पारदर्शी तथा अच्छा नागरिक व विकासशील प्रशासन प्रदान करना। भारतीय रक्षा संपदा सेवा की एक उत्कृष्ट संस्था के रूप में पहचान बनाना।

लक्ष्य

  1. छावनी नगर क्षेत्र को शहरी प्रबन्धन और स्थानीय स्व-शासन के आदर्श के रूप में विकसित करना।
  2. प्रत्येक छावनी में निम्नलिखित की व्यवस्था करना:
    • क) प्रत्येक बच्चे के लिए निःशुल्क एवं स्तरीय स्कूली शिक्षा और यह सुनिश्चित करना कि 18 वर्ष तक का कोई भी बच्चा स्कूली शिक्षा से वंचित न रहे;
    • ख) प्रत्येक निवासी के लिए किफायती और गुणवत्ता वाली स्वास्थय सेवाएं;
    • ग) वयोवृ़द्धों, विशेष रूप से सक्षम (differently abled) और समाज के वंचित वर्गों के लिए समावेशी समाज एवं प्रणाली, और
    • घ) पर्यावरण अनुकुल निवास स्थान;
  3. रक्षा भूमि अभिलेखों की सुरक्षा (आपदा प्रबंधन सहित) और उन्हें नियमित रूप से अद्यतन करने हेतु अभिलेख प्रबन्धन की प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करना।
  4. पुराने अभिलेखों को सुरक्षित रखने, क्षतिग्रस्त कागजात एवं अभिलेखों के पुर्नरूद्धार एवं परिरक्षण और उनको अधिक टिकाऊ प्रपत्रों में परिवर्तित करने के लिए नवोन्नत पुरा अभिलेखागारों की स्थापना करना और उनका अनुरक्षण करना।
  5. रक्षा भूमि को अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण से मुक्त रखने के लिए क्षमताओं और प्रणालियों को विकसित करना।
  6. रक्षा भूमि का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से रक्षा भूमि की संपरीक्षा करना।
  7. रक्षा सम्पदा संगठन के प्रत्येक कार्यालय में स्वच्छ, पारदर्शी, जवाबदेह, कुशल और संवेदनशील प्रशासन प्रदान करना।
  8. रक्षा सम्पदा संगठन के सम्पर्क में आने वाले हितधारकों और जन साधारण के सन्तुष्टि स्तर को अधिकतम करना।
  9. रक्षा सम्पदा संगठन की भविष्य दृष्टि (vision) को साकार करने के उद्देश्य से सक्षम पेशेवरों और नैतिक जन समूहों को तैयार करना।